BREAKING NEWS:-दशा माता व्रत पूजन विधि, जानिए इस रानी ने कैसे संवारी अपनी दशा पड़े ये खबर
भारत परंपराओं और तीज-त्योहारों को देश है. यहां की हवा में हर पल सकारात्मक रहने की सुगंध है और आध्यात्म हमें इसी तरह हर चिंताओं से मुक्त रहने की प्रेरणा देता है. यह वजह है कि हिंदी पंचांग में हर एक तिथि व्रत और त्योहार के रूप में मनाई जाती है. इसी कड़ी में रविवार को माताएं दशा माता की पूजा कर रही हैं. दशा माता की कृपा से परिवार की बिगड़ी हुई दशा ठीक हो जाती है. बिहार में इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है.
ये है परंपरा
विद्वानों के मतों के अनुसार, चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की दशमी को दशा माता का पूजन होता है. होली के त्योहार के आठवें दिन जहां शीतला अष्टमी मनाई जाती है तो वहीं दसवें दिन दशा माता का पूजन किया जाता है. दशा माता हारी-बिमारी, दोष, ग्रह बाधा और काली-बुरी नजर को दूर कर देती हैं. इसके अलावा माता का प्रताप इतना है कि वह किसी भी व्यक्ति को राजा बना सकती है. आर्थिक संकट के कारण जीवन अगर कष्ट में है तो मां उसे तार देती हैं.
होली के दसवें दिन पूजा
धुलंडी के दसवें दिन दशा माता व्रत पीपल पूजा के साथ समाप्त होता है. ऐसे में आज रविवार को बिहार में महिलाएं पीपल के पेड़ परिक्रमा कर उसमें सात सूत बांधती हैं. यह व्रत रविवार को किया जा रहा है. दशा माता पूजन और व्रत परिवार में आर्थिक स्थिति सुधारने और सुख शांति के बनाए रखने के लिए महिलाएं द्वारा की जाता है.
इस मुहूर्त में होगी पूजा
शुभ मुहूर्त - लाभ चौघड़िया के अनुसार शुभ मुहूर्त 9:22 AM बजे से 10:54 AM तक रहेगा.
अमृत चौघड़िया मुहूर्त -10:54 AM बजे से 12 : 27 PM तक रहेगा.
इस रानी ने किया था व्रत
इस व्रत को द्वापर युग से बहुत पहले राजा नल की पत्नी दमयंती ने किया था. दुर्भाग्यवश दमयंती के पति राजा नल का राजपाट छिन गया था और उन्हें अज्ञातवास में भटकना पड़ा था. इसके बाद दमयंती ने दशा माता का व्रत रखा और 11 वर्ष तक उनकी पूजा की. इसके परिणाम स्वरूप राजा को उनका राज्य मिल गया.
