BREAKING NEWS:- वनविभाग गांधीसागर अभ्यारण्य मे भीषण लू के थपेडो वाली गर्मी को मद्देनजर जंगल में वन्यप्राणियो के लिए पानी के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे है !
गांधीसागर से पूरन माटा की ग्राउण्ड रिपोर्ट
वनविभाग गांधीसागर अभ्यारण्य मे भीषण लू के थपेडो वाली गर्मी को मद्देनजर रख 368.62 वर्ग किमी. क्षेत्र मे वन्य प्राणियो को पेयजल की उपलब्धता के लिए पीने के पानी हेतु कोशिश में लगा है | गांधीसागर पूर्व एवं पश्चिम क्षेत्र मे विभागीय टेंकरो के माध्यम से कुत्रीम जल स्रोत जिसमे पक्के सासर, तलाई, तालाब एवं पोखरो मे पानी पहुंचाया जा रहा है। ताकि पेयजल के अभाव मे वन मे रह रहे वन्यप्राणियो को भटकना नही पडे और वन मे ही रहकर अपनी प्यास पहुचा सकें । गेम रेन्जर पन्नालाल रायकवार ने बताया कि 28 पक्के सांसर (कांकीट ) , पूर्व क्षेत्र मे 36 एवं पश्चिम क्षैत्र मे 38 तलाई एवं तालाब मे नियमित रूप से टेंकरो के द्वारा पानी पहुंचा कर इन्हे विभागीय कर्मी के देखरेख मे भरवाया जा रहा है । क्योकि वर्षाकाल के पश्चात् इन जल स्रोतो मे अकटोम्बर, दिसम्बर तक पानी रहता है लेकिन इस वर्ष देर तक होने के कारण पानी भरपूर रहा और अब प्रचंड गर्मी के प्रकोप को देख जंगल में वन्यप्राणियो के लिए पानी के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे है । वन क्षेत्र नजदीकी राजस्थान सीमा से सटे होने से राजस्थान के पशु एवं इनके मालिक तथा संदिग्ध लोग अभ्यारण्य मे प्रवेश को रोकने के लिए विगत दस वर्षों से 154 कि.मी. की दिवाल निर्माण का कार्य प्रस्तावित था जिसे वनविभाग के उच्चाधिकारी इस मंजूरी के लिए प्रयासरत थे । जिसे मंजुरी मिलते ही पूर्व में लगभग 49 किलोमीटर एवं वर्ष 2021/2022 मे 25 किलोमीटर की दीवाल बन चुकी है। साथ ही जंगलो की सुरक्षा को मद्देनजर पश्चिम क्षेत्र में 7 एवं पूर्व क्षैत्र मे 6 वांच टावर तथा दोनो क्षेत्र मे 5 वन चौकियों का निर्माण किया गया है। अवैध वन्य प्राणी के अवैध शिकार को लेकर गेम रेन्जर रायकवार ने बताया कि बीट करनपुरा मे वर्ष 2020 मे चिंकारा के एवं 2021 मे बीट चंबल नें तीन पर रेड सेन्ट गोआ ( दो मुंह का सांप ) का शिकार मे लिप्त आरोपियो को धर पकड किया गया था जिनका प्रकरण न्यायालय मे विचाराधीन है । अभ्यारण्य क्षेत्र मे वर्ष 2019 मे 594 गिद्ध मौजूद थे इसके बाद गणना की वास्तविक रिपोर्ट आना शेष है , इसी प्रकार . वर्ष 2018 मे की गई गणना मे निम्नानुसार वन्यप्राणी के संभावित आंकडे प्राप्त हु ए है । जिनमे तेदुआ ४४, लक्कडबग्घा ३६, सियार५९, लोमडी१३, भेडिया २, जंगली बिल्ली ३, सोनकुत्ता१८, भालू१, नीलगाय१८२, चिंकारा ६१, जंगली सुअर ९ ३, खरहा १०, लंगुर २३४, सेही ०१, मोर ४४, अन्यप्रजाति १० है । इसके बाद हुई गणना मे देहरादुन से उच्चाधिकारियो को आंकडे प्रस्तुत किए जाँएगे ।
