BREAKING NEWS:-नदी किनारे लोग प्यासे बैठे है यानि कि बाहर वालो को बाँटो और गांव वालो घाटो पड़े ये खबर !
गांधी सागर से पुरन माटा की खबर
गांधी सागर नम्बर तीन के रहवासी विगत चार दिन से नलो में पेयजल आपूर्ति नही होने से बेहद खासे परेशान हैं स्थिती यह है कि पीने के पानी अन्य समस्त उपयोगी कार्यो के लिए पानी नहीं मिल रहा है । आमजन इस विकराल समस्या को लेकर बहुत ही ज्यादा चिंतीत और आक्रोशित है जो कभी भी वृहद स्तर पर उग्र आंदोलन का रुप ले सकते है ।
विदित है कि गाँधीसागर मे नल से पानी सप्लाय का एक मात्र माध्यम पेयजल का मुख्य स्रोत है जिसका संचालन मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के अधीन है पचास वर्ष पुरानी पाईप लाईन होने से लाईने सड चुकी है । वर्तमान में स्थिती यह है कि इस कम्पनी के पास स्टॉफ की कमी के साथ फण्ड का अभाव है अधिकारीगण का तर्क रहता है कि गांधीसागर बांध प्रोजेक्ट समय पर उन्हे इस व्यवस्था के लिए अधिकृत किया गया था लेकिन हमारा मुख्य कार्य बिजली उत्पादन एवं विक्रय करना है फिर भी हम पेयजल आपूर्ति कर रहे है ।
रहवासी किशोरदास , पीरुलाल भाट , दिनेश माली , गौरीलाल गुर्जर . , आदि ने बताया कि केन्द्र तथा राज्य सरकार नलजल योजना के अंतर्गत मंदसौर नीमच जिले में करोडो रुपयो की राशी खर्च कर गांधीसागर जलाशय से पानी उपलब्ध करवा रही है , लेकिन गांधीसागर बांध जहां पर अथाह जल संग्रहण है वही के वाशिंदे पानी को तरस रहे हैं । लोगों का कहना है कि सरकार नलजल योजना में बडेस्तर पर प्रचारित है लेकिन शायद उन्हें यह आभास नही है कि नदी किनारे लोग प्यासे बैठे है यानि कि बाहर वालो को बाँटो और गांव वालो घाटो की तर्ज पर गाँधीसागर जहां अथाह जल संग्रहित हैं वही पर पेयजल योजना के असमंजस (विभाग ) को लेकर ग्रामवासियों को पानी के लिए तरसना पड रहा है । यह है स्थिती पेयजल को लेकर
गाँधीसागर बांध निर्माण प्रोजेक्ट के समय पेयजल योजना को मप्र पावर जनरेटिग कम्पनी के अधीनस्थ किया गया था बांध निर्माण को ६३ वाँ वर्ष चल रहा है जो कि उस वक्त पाईप लाईन को डाले भी इतनी अवधी हो गयी है इस अवधी मे पाईप लाईने बिल्कुल ही सड चुकी है और जगह जगह से फट गई है जिसके कारण नलो मे जर्जर लाईन से मिट्टी गंदगी युक्त पानी आना , प्रेशर से नलों मे पानी नही आना बहुत बडी समस्या है तो पंपीग हाउस भी पुराना ढर्रा हो चुका है तो फिल्टर प्लांट भी बुढा हो चुका है जहाँ आए दिन अक्सर टंकियां लिकेज हो रही है। अगर पावर जनरेटिंग कंपनी की माने तो उन्होने कई बार शासन प्रशासन को इस समस्या को लेकर अवगत कराया गया है । अब देखना है कि शासन प्रशासन नल जल योजना के अंतर्गत गांधीसागर के रहवासी जो कि विधानसभा लोकसभा चुनाव के सबसे पहले पांच पोलिंग बूथों में माना जाना चाहता है वहां के मतदाताओं और उनके परिजनो को *नदी किनारे प्यासे का प्यासे की तर्ज* पर इस यूं ही समस्या से जूझने के लिए कितना न्याय दिया जाएगा ।
