DHARMIK :- करवा चौथ पर कब है भद्रा का साया, बिल्कुल ना करें ये काम, जानें क्या है उपाय !

DHARMIK :- करवा चौथ पर कब है भद्रा का साया, बिल्कुल ना करें ये काम, जानें क्या है उपाय !

करवा चौथ 2024: करवा चौथ का त्योहार हिंदू धर्म में बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है. ये त्योहार पति-पत्नी के प्यार को समर्पित है. महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और अपनी पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं. आइये जानते हैं कि इस बार भद्रा का साया कब पड़ रहा है जिस समय किसी भी तरह की पूजा वर्जित मानी जाती है.

करवा चौथ का त्योहार हिंदू धर्म में बहुत महत्व रखता है और इसे धूमधाम से मनाया जाता है. कहा जाता है कि करवा चौथ पर अगर सुहागिन महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करें तो इसका सुखद फल मिलता है. इस व्रत से पति की आयु बढ़ती है और उसे बहुत लाभ मिलता है. लेकिन पूजा के वक्त अगर भद्रा का साया पड़ रहा है तो ऐसे में कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना जरूरी है. बता रहे हैं वो बातें जिन्हें अगर पूजा के वक्त ध्यान रखा जाए तो इसका लाभ मिलेगा.
करवा चौथ का त्योहार हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में पड़ता है. साल 2024 में ये त्योहार 20 अक्टूबर के दिन पड़ रहा है. इस दिन शुभ मुहूर्त की बात करें तो इसकी शुरुआत शाम को शाम को 5 बजकर 46 मिनट पर होगी और 7 बजकर 02 मिनट पर इसका समापन हो जाएगा. वहीं चंद्रोदय की बात करें तो इसकी शुरुआत शाम को 7 बजकर 58 मिनट पर हो जाएंगी.
भद्राकाल को हिंदू धर्म के हिसाब से बढ़िया काल नहीं माना जाता है और इस दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य को करने की मनाही होती है. इसके अलावा ये एक ऐसा समय होता है जिसमें कोई यात्रा करने या खरीदारी करने की रोक-टोक होती है. साल 2024 के करवा चौथ वाले दिन भी भद्रा काल का साया पड़ रहा है. 20 अक्टूबर को भद्राकाल की शुरुआत सुबह 06 बजकर 24 मिनट पर होगी और इसका अंत सुबह 06 बजकर 46 मिनट पर होगा. ये 22 मिनट वो हैं जिसमें हिंदू धर्म में किसी भी तरह का पूजा-पाठ करने की मनाही होती है.
हिंदू धर्म में शुभ और अशुभ में कार्य शैलियां बंटी हैं. आपको इस बात का पता होना चाहिए कि कभी भी अशुभ घड़ी में शुभ कार्यों को या किसी भी नए कार्यों को नहीं शुरू करना चाहिए. इसका नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है. भद्रा के शरीर के अंगों के आधार पर इसकी गणना की जाती है. कहा जाता है कि अगर भद्रा का कंठ, हृदय और मुख धरती पर है तो ये एक अशुभ घड़ी है और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए. इसके अलावा इस दिन किसी भी तरह का कोई भी शुभ कार्य करने से भी बचना चाहिए.

भद्रा का उपाय क्या है

भद्राकाल को सबसे अशुभ घड़ी माना जाता है. कहा जाता है कि भद्राकाल के दौरान अगर भद्रा की पूंछ धरती पर हो तभी ये शुभ है अन्यथा अन्य सभी परिस्थितियों में भद्रा का साया कष्टदायी माना जाता है. कहा जाता है कि भद्राकाल के प्रकोप से अगर कोई परेशान है तो ऐसे में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है. इस दिन अगर सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा की जाए तो इसका लाभ भक्तों को मिल सकता है.

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