BREAKING NEWS :-लगभग 700 जिंदा पेड़ो की कटाई,1.5 मील वॉल के पत्थरों की हटाई ,विगत 15 दिनों से कार्य जारी वहीं क्या सो रहे वन विभाग अधिकारी और कर्मचारी पड़े ये खबर !

BREAKING NEWS :-लगभग 700 जिंदा पेड़ो की कटाई,1.5 मील वॉल के पत्थरों की हटाई ,विगत 15 दिनों से कार्य जारी वहीं क्या सो रहे वन विभाग अधिकारी और कर्मचारी पड़े ये खबर !

वन विभाग सब रेंज भदाना की कुंभकर्णी लापरवाही, क्यों नहीं हो निलंबन की कार्यवाही...?

रामपुरा/नीमच(मप्र):- वन विभाग में कहा जाता है कि वन जंगल वन विभाग के अधिकारियों वनकर्मियों का घर होता है और वन्य पेड़ पौधे तथा वन्यजीव उनके बच्चे। तथा इनकी सुरक्षा के लिए शासन प्रशासन द्वारा द्वारा वन मंडलाधिकारी, उपवन मंडलाधिकारी, वन परिक्षेत्राधिकारी, उपवन परिक्षेत्राधिकारी, वनकर्मियों इत्यादि की नियुक्ति की जाती है। बावजूद इसके जिला नीमच अंतर्गत वन परिक्षेत्र रामपुरा अंतर्गत सब रेंज भदाना के अमरगढ़ वन क्षेत्र में अज्ञात बदमाश मजदूरों के माध्यम से खुलेआम हरे-भरे जिंदा पेड़ काटकर ट्रैक्टर पहुंचाने के लिए रास्ता बना रहे हैं। वन विभाग द्वारा बनाई पत्थर की बाउंड्रीवॉल से पत्थर चोरी कर रहे हैं तथा यह काम 15 दिन से जारी है और सबरेंज भदाना अधिकारी व वन कर्मियों को खबर ही नहीं? यह एक विचारणीय सवाल हैं।क्या संबंधित अधिकारी वन कर्मी सो रहे हैं? स्थानीय ग्रामीणजन का कहना हैं कि यहां एक किमी की दीवार से 200 से 250 ट्रॉली पत्थर निकाले व 700 से अधिक हरे पेड़-पौधे काटे गए हैं। इसमें 2 साल से अधिक उम्र के करीब 300 पौधे काटे गए हैं तथा वन विभाग के चौकीदार भी शामिल होने की बात सामने आ रही है। सूचना प्राप्ति पर मीडिया द्वारा मौके पर देखा गया कि मजदूर पत्थर ट्रैक्टर में भर रहे थे। जानकारी लेने पर वे बिना कुछ बताए वहां से चले गए। इन्होंने वन क्षेत्र से सैकड़ों हरे पेड़ की सफाई कर दी। मामले में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी अनजान है। उनसे सवाल किए जाने के बाद अब अधिकारी जांच कराने व कार्रवाई की बात कह रहे हैं। ऐसे में किसी तरह की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।

वन विभाग के अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पत्थर की दीवार गांधीसागर मंदसौर क्षेत्र में ही बनती है। गेम प्रूफ वॉल का निर्माण 1.8 मीटर का होता है। सीपीडब्ल्यू (केटल प्रूफ वॉल) 1.2 मीटर की बनती है। इसमें 0.70 प्रति रनिंग मीटर मानव दिक्स से भुगतान किया जाता है। ऐसे में रामपुरा

क्षेत्र से करीब 1 किमी की वॉल गायब कर दी गई जिससे करीब 2 लाख नुकसान हुआ है। साथ ही 700 पौधे लगाने व मेंटेनेंस पर अलग-अलग खर्च होता है। उसका आकलन उसकी देख-रेख पर कितना खर्च किया, उसी से लगाया जा सकता है। अनुमान से देखें तो करीब 700 पौधे को लगाने, गड्ढे खोदने, मिट्टी बदलने, खाद सहित अन्य कार्यों पर तीन से चार लाख का खर्च होता है। किसी वन क्षेत्र में इस तरह की गड़बड़ी हो रही तो बीट प्रभारी, चौकीदार, उप परिक्षेत्र अधिकारी, परिक्षेत्राधिकारी, उपवन मंडलाधिकारी भी जिम्मेदार क्यों नहीं है? इनसे वसूली व कुछ पर निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं बनती है?

 पेड़ कटाई व पत्थर हटाने का कार्य 15 दिन से चल रहा है और इसके बाद अधिकारियों वन कर्मियों को जानकारी ना हो यह एक जांच और विचार का विषय हैं?

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