BREAKING NEWS:- सहकारिता विभाग और तथाकथित सोसाइटी बैंक आठ बाय चार की खोलिया में संचालित हो रहीं हैं तथाकथित सोसाइटी बैंक रूपी ब्याज बट्टा दुकानें,अधिकारियों का बढ़ावा ही करा रहा क्षेत्रीयजन के करोड़ों का स्कैम घोटाला !

BREAKING NEWS:- सहकारिता विभाग और तथाकथित सोसाइटी बैंक  आठ बाय चार की खोलिया में संचालित हो रहीं हैं तथाकथित सोसाइटी बैंक रूपी  ब्याज बट्टा दुकानें,अधिकारियों का बढ़ावा ही करा रहा क्षेत्रीयजन के करोड़ों का स्कैम घोटाला !

ना ऑफिस और ना स्टॉफ फिर नाम हैं कोऑपरेटिव सोसाइटी बैंक,

आमजनता के करोड़ों रुपयों की सुरक्षा का ज़िम्मेदार कौन...?

रामपुरा/नीमच(मप्र):- एक आमजन के कानों पर जब कभी ऐसी ख़बर पहुंचती है जिसमें कहा जाता हैं कि, अमुक सोसाइटी कंपनी का करोड़ों का घोटाला हुआ, एक कंपनी करोड़ों जनता के रुपए लेकर भाग गई, उन कम्पनियों के मालिक फरार हो गए। तब वह आमजन 2 पल की उस ख़बर को सुन कर थोड़ा मुस्कुरा कर, थोड़ा मन पसीच कर तथा दो चार मित्रों को बता कर या फिर अगर वह थोड़ा भावुक हैं तो स्थानीय रुपए कलेक्शन एजेंट को पकड़ कर दो चार शुद्ध भाषा का उपयोग कर अपना गुस्सा शांत कर लेता हैं क्यों? क्योंकि उसकी सुनने वाला कोई नहीं होता और ना ही उसे इतना पता है कि आगे क्या करना हैं तथा मुख्य बात उस गरीब के पास इतना समय नहीं हैं कि वह उसके उलझाए कड़ी मेहनत के चंद रुपयों को निकालने के लिए फिर से समय लगाएं। और वहीं इस मजबूरी और ऐसे कई लोगों थोड़ा थोड़ा जमा रुपयों द्वारा इकट्ठा हुआ करोड़ों रुपयों का फायदा चंद दिमागदार रसूखदार अरबों का स्कैम घोटाला सोसाइटी बैंक के नाम कर जाते हैं।

इन सब का एक केंद्र बिंदु होता हैं जिसे कहते है सहकारिता विभाग का अधिकारी। यह एक ऐसा बिंदु है जिसे सब कुछ पता होने के बावजूद भी कुछ पता नहीं होता हैं, या फिर यूं कहे कि वह खुद उसमें सहयोगी हैं कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा।

इसका प्रत्यक्ष उदाहरण गत दिनों हुई  आठ बाय चार की खोली में संचालित तथाकथित कॉपरेटिव सोसाइटी बैंक रूपी ब्याजबट्टे की दुकान की शिकायत जांच दौरान देखने को मिला। जहां उस जांच अधिकारी को यह सब दिखाई देकर रहा कि ना ऑफिस है ना नेम बोर्ड (केवल बैनर) हैं ना स्टॉफ हैं तथा संचालन समिति में एक ही परिवार के रक्त संबंधी तीन सदस्यों सहित ग्यारह सदस्यों के नाम जिसमें ताज्जुब करने वाली बात यह कि बाकी आठ सदस्यों को यह पता भी नहीं कि हम किसी सोसायटी के सदस्य भी हैं, ना सालाना बैठक, ना ही कोई ऑडिट लेखा जोखा, वही जांच अधिकारी को यह भी दिख रहा हैं कि कई ग्रामीण किसानों की कृषि भूमि के कागज़ात गिरवी पैठे रख कर सोसाइटी बैंक के नाम पर शुद्ध ब्याज बट्टे का कार्य संचालित हो रहा हैं, किंतु जांच अधिकारी जान कर भी अनजान बने देख कर रहा हैं। जांच पूर्ण होने पर सोसाइटी बैंक संचालक के विरुद्ध कोई प्रशासकीय कार्यवाही नहीं किए जाने पर संबंधित अधिकारी से मीडिया द्वारा इसका कारण पूछे जाने पर कहा गया कि, यहां सब सही संचालित हैं , मैने रिपोर्ट तैयार कर दी हैं, संतुष्ट होना अथवा उच्च कार्यवाही करना यह शिकायतकर्ता और जिला अधिकारी के हाथ में हैं।

अब सवाल यह उठता है कि सबकुछ जानने तथा मौके पर तथ्य सबूत मौजूद होने के बावजूद भी अगर अधिकारी सोसाइटी बैंक पर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा हैं तब इसे क्या कहा जाएं?

यह जनता ही बताएं...? 

और नया पुराने