BREAKING NEWS:- ग्रीनको प्रोजेक्ट खिमला प्रोजेक्ट प्रबंधन ने पहली बार रखा अपना पक्ष,जमीनी कब्ज़ा और मजदूरों की मौत को बताया कोरी अफवाह...,
रामपुरा/नीमच(मप्र):- जिला नीमच अंतर्गत रामपुरा तहसील क्षेत्र के ग्राम खिमला के समीप बन रहे ग्रीनको प्रोजेक्ट में अक्सर जमीन पर कब्जा करने सहित मजदूरों की हो रही मौत को लेकर सूचना आ रही है। कभी कंपनी द्वारा आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने, तो कभी प्लांट में असुरक्षित काम कर रहे मजदूरों की मौत को लेकर लगातार खबरें सामने आ रही है। इस पूरे मामले में प्लांट प्रबंधन ने पहली बार अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि प्लांट में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। इसके अलावा प्रोजेक्ट के लिए जितनी जमीन की जरूरत है, वह उन्हें मिल चुकी है। अधिकांश सूचना अथवा खबरों को अफवाह बताया है।
जानकारी अनुसार बीते दिनों खिमला गांव के आदिवासियों के साथ जिला पंचायत सदस्य आर सागर कछावा कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे थे। अपना विरोध दर्ज कराया था। इससे पहले कछावा ने मनासा कोर्ट के सामने धरना दिया था। अब प्लांट से मजदूरों की मौत होने के मामले सामने आ रहे है। इस पूरे मामले को लेकर पहली ग्रीन को के जनरल मैनेजर तिलक राज शर्मा तथा अमित सोनी ने अपना पक्ष रखा। तिलक राज शर्माने बताया कि बीते दिनों ग्रीन में जो दुर्घटना का मुद्दा आया था, उसमें टनल के अंदर कुछ मजदूर काम कर रहे थे, इस दौरान अचानक टनल के ऊपर से मलबा गिरने से दो मजदूर घायल हो
गए थे। इनमें एक की मौत हो गई, जबकि दूसरे का ज्ञानोदय मल्टीस्पेशीलीटि हास्पिटल में उपचार जारी है। मजदूर की मौत के बाद प्लांट में काम कर रहे मजदूरों ने हड़ताल शुरु कर दी। मुआवजे की मांग को लेकर कंपनी के वर्कर हडताल करने लगे। शर्मा ने बताया कि मुआवजा एक प्रक्रिया के तहत दिया जाता है। वैध दस्तावेजों के आधार पर मजदूर के परिजनों को मुआवजा दिया जाता है। मुआवजा देने की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता रखी जाती है। मंदसौर के लैबर कमिश्नर के जरिए मजदूर के परिजनों को भुगतान किया जाता है। जब से प्लांट शुरु हुआ, तब से यहां कुल 3 मजदूरों की मौत हुई है। पूर्व में हुई दुर्घटना में जो मजदूर की मौत हुई थी, जिसमें उसके परिजनों को 11 लाख 56 हजार रुपए दे चुके है। हडताली मजदूर मुआवजा नहीं देने सहित सुरक्षा की मांग कर रहे थे, लेकिन प्लांट में मजदूरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम है। ग्रीन को के अपने सेफ्टी फ्फिसर है, सेफ्टी इंजीनियर है। इसके अलावा एल एंड टी तथा रितविक जैसी कंपनियों के पास भी अपने सेफ्टी अधिकारी है। प्लांट में एमबीबीएस डॉक्टर को नियुक्ति किया हुआ है। जो 24 घंटे सेवा देते है। फ़ार्मासिस्ट और डिस्पेंसरी भी है। सुरक्षा के नजरिए से हर बात का ध्यान रखा गया है। जिन 3 मजदूरों की मौत हुई है। उनमें से 2 को मुआवजा दे चुके है, जबकि एक मजदूर को मुआवजा देने की प्रक्रिया जारी है। जल्द मुआवजा दिया जाएगा।
वहीं जमीन पर कब्जे मामले को लेकर मैनेजर अमित सोनी ने बताया कि, जितनी जमीन आवश्यकता है, वह पूरी हो चुकी है। कुछ किसानों से बातचीत चल रही है। उसका भी हल निकल जाएगा। किसी प्रकार से जमीन पर
कब्जा नहीं किया गया है। सारी जमीन खरीदी गई शासन के नियमानुसार जमीन का कय किया गया है। यह प्रकिया पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से की गई है। जमीन खरीदने के लिए पक्ष-विपक्ष की बैठक होती है। जो भी भाव तय होता है। उस पर जमीन कय की जाती है। जमीन पर कब्जा करने की जो अफ्फ्रवाहें आ रही है, वह पूरी तरह से गलत है। किसी भी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। जिन्होंने जमीन नहीं बेची। उन्हें कभी भी जमीन पर आने से नहीं रोका गया है। पूर्व की गाइडलाइन के मुताबिक किसानों ने से जमीन खरीदी थी। वर्तमान में जो गाइडलाइन है उस हिसाब से जमीन खरीद रहे है। ऐसे में स्वाभाविक है कि भूमि के दाम में अंतर आएगा। बावजूद इसके पूर्व में जिनसे जमीन खरीदी थी, उनको विभिन्न माध्यमों से लाभ पहुंचाया जा रहा है। प्लांट में काम देकर या उनके वाहनों को प्लांट में अटैच कर उन्हें लाभ पहुंचाया जा रहा है। यह जरूर है कि शुरुआत में किसानों ने अपनी आवश्यकता अनुसार उनकी जमीन बेची। उन्हें दाम कम मिले हो।
