BREAKING NEWS:-रामपुरा में शीतला सप्तमी पर शीतला माता मंदिर मैं महिलाओ ने की पूजा !

BREAKING NEWS:-रामपुरा में शीतला सप्तमी पर शीतला माता मंदिर मैं  महिलाओ ने की पूजा !


रामपुरा से महावीर चौधरी की रिपोर्ट  

रामपुरा सहित पूरे अंचल  में शीतला माता पूजन को लेकर महिलाओं में अपार उत्साह का वातावरण रहता है होलिका दहन के अगले दिवस से ही माताएं एवं महिला वर्ग प्रातः सर्वप्रथम शीतला माता की पूजन कर  उसके बाद घर का सारा काम करती है एवं होली के 6 दिवस बाद शीतला सप्तमी के दिन एक दिवस पूर्व शीतला माता  के लिए ठंडा एवं बासी भोजन का भोग माता को लगाया जाता है रामपुरा अंचल में शीतला माता पूजन के लिए महिलाएं रात में माता को चढ़ने वाला प्रसाद जिसमें ज्वार के आटे के ढोकले भीगा हुआ चना चावल दही आदि प्रसाद बनाती हैं नगर के मध्य होने से इस मंदिर के आसपास दिनभर एक दिवसीय मेले का माहौल रहता है नगर का प्रमुख मन्दिर होने से यहा पूजन के लिए भारी भीड़ उमड़ती है इसी को ध्यान में रखते हुए नगर परिषद पुलिस प्रशासन विभाग ने मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों को 1 दिन के लिए आमजन के लिए बंद रखकर बैरिकेट्स लगाकर व्यवस्था की साथ  ही रात्रि में पूजन को आने वाली महिलाओ के लिए प्रकाश एवं पर्याप्त पुलिस बल की समुचित व्यवस्था की गई है। साथ ही पूजन को आने वाली महिलाओं के लिये भी पेयजल की समुचित व्यवस्था की गई है 

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शीतला अष्टमी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक राज्य के राजा का एक ही बेटा था. उसे चेचक (शीतला) निकला था. उसी राज्य के एक गरीब परिवार के बेटे को भी शीतला निकली हुई थी. वह परिवार मां भगवती की पूजा करता था. उस परिवार ने शीतला के समय जिन भी नियमों का पालन किया जाता है, उन सबका ध्यान रखा. घर में बिना छौंक के सब्जी बनती थी, भुने या तले हुए खानों और नमक पर पाबंदी थी. घर के सभी लोग ठंडा खाना ही खाते थे. ऐसा कुछ दिन तक चला और उस परिवार का बेटा स्वस्थ हो गया.

दूसरी ओर राजा के बेटे का रोग ठीक नहीं हो रहा था. राजा ने शतचंडी का पाठ शुरु कराया. रोज गरम स्वादिष्ट भोजन बनते थे. भुने और तले हुए भोजन खाया जाता था. मांस भी बनाया जाता था. राजा का बेटा जो भी जिद करता था, वह पूरी कर दी जाती थी.

इनके सबके कारण राजा के बेटे के शरीर में फोड़े हो गए. उसमें खुजली और जलन होने लगी. जो उपाय किया जाता, उसका कोई असर नहीं होता. शीतला का प्रकोप और बढ़ गया. इन सबसे राजा परेशान हो गया. वह सोचने लगा कि आखिर इतने उपाय करने के बाद भी शीतला का प्रकोप शांत क्यों नहीं हो रहा है.

राजा के गुप्तचरों ने उसे बताया कि राज्य में एक गरीब परिवार के बेटे को भी शीतला निकली थीं, लेकिन वह कुछ दिनों में ही स्वस्थ हो गया था. तब राजा ने सोचा कि वह तो माता की इतनी सेवा कर रहा है, फिर भी उनका प्रकोप कम क्यों नहीं हो रहा है. उसका बेटा स्वस्थ क्यों नहीं हो रहा है.

राजा ये सब बातें सोचते-सोचते सो गया. उसके स्वप्न में शीतला माता ने दर्शन दिया. राजा से कहा कि वह उसकी सेवा और पूजा से प्रसन्न हैं, लेकिन तुमने शीतला के नियमों को तोड़ा है, इस वजह से शीतला का प्रकोप शांत नहीं हो रहा है, इसके लिए तुम खाने में नमक बंद कर दो, बिना छौंक के सब्जी बनाओ, खाने में तेल का प्रयोग न करो और सभी लोग ठंडा भोजन करें. बेटे के पास किसी को मत जाने दो. ऐसा करो, जल्द ही तुम्हारा बेटा स्वस्थ हो जाएगा.

अगले दिन से राजा शीतला माता के बताए गए नियमों का पालन करने लगा. देखते ही देखते कुछ ही दिनों में राजा का बेटा स्वस्थ हो गया

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. रामपुरा हलचल न्यूज़  इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

 

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