BREAKING NEWS:-जल संसाधन अधिकारी की उदासीनता कैसे बनेगा पर्यटन स्थल गांधीसागर,जल संसाधन विभाग गाँधीसागर के पार्क हुए विरान,उजाड गांधीसागर से @पूरन माटा की खबर...... !

BREAKING NEWS:-जल संसाधन अधिकारी की उदासीनता कैसे बनेगा पर्यटन स्थल गांधीसागर,जल संसाधन विभाग गाँधीसागर के पार्क हुए विरान,उजाड गांधीसागर से @पूरन माटा की खबर...... ! 


मंदसौर@गांधीसागर -जल संसाधन विभाग गाधीसागर ने चार दशक पूर्व  पर्यटन की दृष्टि एवं सौन्दर्यता को देख करीब एक दर्जन उधान स्थापित किए जिनमे हरियाली, बड़े एवं बच्चों के मनोरंजन के लिए झुले चकरी रिपस पट्टी आदि सुविधा उपलब्ध कराई गई थी । मगर अगर देखा जाए तो पिछले दो दशको से यह उधान नाममात्र के शो पीस बनकर उजड रहे है विभाग के जिम्मेदारों को भी इन उधानो की याद नही होगी की यहाँ कितने उधान है । बानगी देखिए तस्वीरें स्वयं बयां कर रही है गाँधीसागर नम्बर आठ पर ग्राम पंचायत कार्यालय के ठीक सामने बना उधान हरी घास से भरा हुआ है तो "सी टाइप कालोनी " जहाँ आठ शासकीय अधिकारियो के लिए  आवास के सामने ही विशाल उधान में बडी बडी गाजर घास ने इस उधान को इस तरह घेर रखा है कि पार्क को एक छोर से दूसरे छोर तक जाने का रास्ता ही नही है। यह तो रहवासी बस्ती और मुख्य बसस्टेण्ड का उद्यान की हालात है जिसे आवागमन करने वाले मुसाफिर या पर्यटक देखकर सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि पर्यटन स्थल गाँधीसागर की क्या स्थिती है । यहाँ कहना अतिश्योक्ति होगी कि फर्स्ट इंप्रेशन इस द लास्ट इंप्रेशन कहावत से स्पष्ट होता है कि किसी ग्राम नगर के प्रवेश में ही स्पष्ट हो जाता है कि पहला नजारा देखते ही वहाँ की अन्य व्यवस्था कैसी होगी ।

गाँधीसागर के प्रबुद्धजन पूरन माटा , महेन्द्रसिंह आरोड़ा, पंकज प्रजापति (उपसरपंच ), संजय पाण्डे , अनूप गुप्ता , राकेश जैन , मदन वधवा का कहना है कि पर्यटन स्थल, अभ्यारण्य क्षेत्र , पूर्व में झील महोत्सव और वर्तमान में टेंट सिटी, गाँधीसागर जलाशय और मानव निर्मित झील और अब नगर पंचायत का तमगा हासिल कर गाँधीसागर के दुर्दशा हालत पार्को की जल संसाधन विभाग सुध नही ले सकता तो ग्राम पंचायत को अधिग्रहित कर देना चाहिए जिससे मृतप्राय पडे पार्क पुर्नजीवित का रुप ले सके ।

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