गाँधीसागर (पूरन माटा ) रावतभाटा के फिजीक्स के शिक्षक एवं वैज्ञानिक एस एल छाबड़ा ने सिंगल टरबाईन ट्वीन जनरेटर टाइप विधुत संयत्र की खोज की है । इसके उपयोग से वर्तमान से वर्तमान मे विधुत संयंत्रो में किया जा रहा विधुत उत्पादन दो गुना किया जा सकता है । छाबड़ा ने बताया कि वर्तमान में जितनी दाब ऊर्जा की मात्रा का उपयोग कर एक विधुत संयत्र विधुत उत्पादन कर रहा है यदि उतनी ही दाब ऊर्जा की मात्रा दोगुनी विधुत ऊर्जा की मात्रा से दो गुनी विधुत ऊर्जा की मात्रा का उत्पादन करेगा । भारत सरकार के नईदिल्ली स्थित पेटेंट कार्यालय मे एस एल छाबड़ा को सिंगल टरबाईन ट्विन जनरेटर टाइप नामक अविष्कार के लिए पेटेंट अधिनियम 1970 के उपबंधो के अनुसार २० वर्ष के लिए पेटेंट प्रदान किया है । छाबड़ा ने हाइड्रो थर्मल व न्युक्लियर विधुत संयंत्रो को अध्ययन किया गया तो पाया गया कि वहाँ वैज्ञानिक अल्बर्ट आइस्टिन के सिद्धांत ऑफ कंजरवेशन ऑफ एनर्जी का पालन नही हो रहा है । इस पर उन्होंने अपने पुत्र इंजिनियर हेमन्त छाबड़ा के सहयोग से अलबर्ट आईस्टिन के सिद्धान्त पर काम करते इस नई तकनीक पर काम किया है । *यह होगा फायदा* देश मे थर्मल एव न्युक्लियर पावर स्टेशन में सैंकडो विधुत संयंत्र कार्यरत है नई तकनीक का पुराने संयंत्र स्थल पर प्रयोग किया जाता है तो संयंत्र स्थापना के 10 फीसदी राशि मे ही विधुत ऊर्जा का उत्पादन दो गुना हो जाएगा इस तकनीक से संयंत्र लगाए तो निर्माण लागत पुरानी तकनीक से काफी कम होगी । एस एल छाबड़ा रावतभाटा निवासी होकर गाँधीसागर एवं भानपुरा माटा परिवार के दामाद है इस उपलब्धि पर उन्हें गर्वित होकर बधाई प्रेषित की है।
BREAKING NEWS :-वैज्ञानिक एस एल छाबड़ा ने सिंगल टरबाईन ट्वीन जनरेटर टाइप विधुत संयत्र की खोज की है ।
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