BREAKING NEWS:- अफीम काश्तकारों की कड़ी मेहनत का लाभ किसानों से ज्यादा दवा कंपनियों को क्यों-कांग्रेस नेता प्रकाश जैन रांका
कांग्रेस नेता प्रकाश जैन रांका ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र और राज्य में बीजेपी की सरकार हैं उसके बावजूद क्षेत्र के किसान बदहाल हैं । मालवा की जमी किसानी के अनुकूल हैं सालों से यहाँ आजीविका का प्रमुख साधन खेती रहा हैं । कृषक वर्ग आज भी सीपीएस पद्धति का विरोध कर रहा हैं मगर किसान विरोधी भाजपा सरकार के कानों पर जू तक नहीं रेंग रही हैं ।
*भारत मे अफीम की खेती का है ऐतिहासिक महत्व*
रांका ने बताया कि अफीम की खेती का परिचय भारत मे 330 ई.पु. से प्राप्त होता । 1000 ईसापूर्व से भारत मे अफीम की खेती होती आ रही हैं जो आज तक निरंतर जारी हैं । अफीम का मुख्य उपयोग औषधीय प्रयोजनों के लिये मार्फिन, थिबेन, कोडीन ओर उनके डेरिवेटिव जैसे अलकलेइड के निष्कर्षण के लिए भारत में वैद्य रूप से ही उगाया जा सकता हैं अफीम के ऐतिहासिक महत्व के साथ ही हर समयकाल में इसकी उपयोगिता रही हैं ऐसे में सरकार अफीम नीति को लेकर जो भी फैसले ले वो किसानों के अनुरूप होना चाहिए ।
*किसानों ने कांग्रेस नेता से क्या कहा*
कांग्रेस नेता रांका ने आगे बताया कि क्षेत्र के किसानों द्वारा सूचना प्राप्त हुई हैं कि सीपीएस पद्धति से खेती करने से पोस्ता की मात्रा प्रति आरी कम होगी जो कि इस फसल से आय का मुख्य स्त्रोत है । अफीम से बनने वाली जीवन रक्षक दवाओं से भारी मुनाफा तो दवा कंपनियों को मिल रहा है परंतु अफीम काश्तकारों के दामों में अधिक व्रद्धि देखी नहीं गई । टर्की से आयातित पोस्ता दाना के कारण भारतीय किसानों को उचित रेट नहीं मिल पाती, सरकार के गेर जिम्मेदाराना रवैये के कारण तय समय पर मंडी नहीं खुलने से किसान पोस्ता दाना अन्यत्र कम दामों पर बेचने को मजबूर होते है । सरकार से डोडाचूरा खरीद की रेट में व्रद्धि करने की मांग भी किसान लगातार कर रहे है ।
*सीपीएस पद्धति में किसानों को किन बातों का ध्यान रखना है ।*
एक जनप्रतिनिधि होने के नाते मेरी जिम्मेदारी बनती है कि क्षेत्र के किसानों को सजग रखु इसी सबन्ध में सीपीएस पद्धति में शामिल किसानों से मेरी अपील है कि कटाई के लिए तैयार अफीम फसल को किसान चीरा नहीं लगा सकते है इसके बदले में किसान को 8 इंच लंबा डोडा डंठल सहित देना होता हैं । पोस्तादाना निकालते समय किसान इस बात का ध्यान रखे डोडा टूटे ना ओर उसका चुरा भी न हो, डोडे के ऊपरी भाग में छेद करके किसानों को पोस्ता निकालना है। तत्पश्चात शेष बचे डोडो को पेक बोरो में लम्बरदार की उपस्थिति में तोल केंद्र पर लाना हैं ।
*कांग्रेस की सरकार आएगी तो किसानों की मांग के अनुरूप अफीम फसल की नीति बनाई जाएगी ल*
सीपीएस पद्धति में न तो किसानों को पोस्ता दाना का उचित रेट मिल रहा और नाही डोडा का । इसी के साथ ही फसल देने की प्रक्रिया भी जटिल है । रांका ने यह भी कहा कि क्षेत्र का किसान दिन-रात जागकर अफीम की फसल की देखभाल करता है जहां उसे मौसम के साथ-साथ, चोर लुटेरों ओर तस्करों से भी बचाना पड़ता हैं उसके बाद अगर फसल सुरक्षित रह जाये तो मार्फिन की मात्रा उचित अनुपात में हो यह भी एक दुविधा हैं । कांग्रेस नेता रांका ने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार आएगी तो किसानों के अनुरुप योजना बनाई जाएगी सर्वे कराकर छोटे किसानों के साथ ही बड़े किसानों को भी अधिक से अधिक लाभ प्राप्त हो इस ओर ध्यान दिया जाएगा। क्योंकि किसान है तो सब खुशहाल है और अन्नदाता ही बेहाल है तो वो सरकार लोककल्याणकारी नहीं कहीं जा सकती ।
