KNOWLEDGE : - इस राज्य का नाम बिहार कैसे पड़ा, इसका इतिहास कितना पुराना है और इसने देश-दुनिया को क्या क्या दिया?

KNOWLEDGE : - इस राज्य का नाम बिहार कैसे पड़ा, इसका इतिहास कितना पुराना है और इसने देश-दुनिया को क्या क्या दिया?


विधानसभा चुनाव के परिणामों के साथ एक बार फिर बिहार चर्चा में है. बिहार वो राज्य है जिसने न केवल भारतीय इतिहास को दिशा दी, बल्कि विश्व इतिहास, दर्शन, धर्म, राजनीति और शिक्षा पर भी गहरा प्रभाव छोड़ा. आज भी देश का शायद ही कोई राज्य ऐसा होगा जहां इस धरती से निकले लोग अखिल भारतीय सेवा में न तैनात हों.

बिहार विधान सभा चुनाव के परिणाम आ गए हैं. भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित इस राज्य के बारे में कोई कुछ भी कहे लेकिन यह सिर्फ एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक गहरी ऐतिहासिक चेतना, समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और ज्ञान परंपरा का प्रतीक है. इस प्रदेश ने न केवल भारतीय इतिहास को दिशा दी, बल्कि विश्व इतिहास, दर्शन, धर्म, राजनीति और शिक्षा पर भी गहरा प्रभाव छोड़ा. आज भी देश का शायद ही कोई राज्य ऐसा होगा जहां इस धरती से निकले लोग अखिल भारतीय सेवा में न तैनात हों.आइए क्रमवार समझें कि बिहार नाम कैसे पड़ा, इसका इतिहास कितना पुराना है और इसने देश-दुनिया को क्या क्या दिया?

बिहार नाम कहां से आया?

आज जिस प्रदेश को हम बिहार कहते हैं, उसके नाम की जड़ संस्कृत और पाली भाषा के शब्द विहार में मिलती है. प्राचीन और मध्यकालीन काल में यह क्षेत्र बौद्ध विहारों (मठों), जैन धर्म के साधना स्थलों और हिन्दू आश्रमों से भरा हुआ था. बौद्ध भिक्षुओं के रहने साधना के स्थान को विहार कहा जाता था. कालांतर में नालंदा, विक्रमशिला, कुशीनगर से जुड़े अनेक मठों विहारों की सघनता के कारण यह इलाका विहारों की भूमि कहलाने लगा.

समय के साथ विहार का अपभ्रंश बिहार बन गया. मध्यकालीन फारसी और अरबी लेखकों ने भी इस क्षेत्र को बिहार या बिहर लिखा है, क्योंकि वे इन स्थानों को बौद्ध जैन मठों का केंद्र मानते थे. इतिहासकार रोमिला थापर, आर.सी. मजूमदार, जगदीश नारायण सरकार आदि की पुस्तकों के हवाले से यह तथ्य मिलता है कि बिहार नाम व्यापक रूप से मुगलकाल तक प्रचलित हो चुका था, लेकिन इसकी जड़ बौद्धकालीन विहार परंपरा में बैठी है.

बिहार का इतिहास कितना पुराना?

बिहार का इतिहास भारत की सबसे प्राचीन सभ्यताओं और राजतंत्रों से जुड़ा है. सोन घाटी, गंगा घाटी और चिरांद (सरन जिला) आदि स्थानों से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि यहां हजारों वर्ष पहले मानव बसावट थी. ऋग्वैदिक और उत्तर वैदिक साहित्य में मगध, अंग, विदेह, वज्जि आदि जनपदों का उल्लेख मिलता है.

ये सभी आज के बिहार और उसके आसपास के क्षेत्र में स्थित हैं. ईसा पूर्व 6वीं5वीं शताब्दी में पूरे उत्तर भारत में 16 महाजनपदों का वर्णन मिलता है, जिनमें से कई वर्तमान बिहार में थे या हैं. उदाहरण के लिए मगध को लेते हैं. इसकी राजधानी प्रारंभ में राजगृह (राजगीर), बाद में पाटलिपुत्र (आज का पटना) हुई. वैशाली इसके प्रमुख नगरों में शुमार रहा. भागलपुर के आसपास का क्षेत्र अंग क्षेत्र के नाम से जाना-पहचाना जाता है. इतिहास में मिथिला क्षेत्र को विदेह के नाम से भी जाना जाता है.

महाजनपदों ने संगठित शासन को दी दिशा

इन महाजनपदों ने भारतीय राजनीति को पहली बार संगठित शासन, संहिता और कानून की दिशा दी. बिंबिसार, अजातशत्रु आदि शासकों ने मगध को शक्तिशाली बनाया. मगध से ही बाद में भारत के सबसे बड़े प्राचीन साम्राज्य विकसित हुए. मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य, बिंदुसार, अशोक आदि ने पाटलिपुत्र (पटना) को राजधानी बनाया. चंद्रगुप्त मौर्य ने यूनानी सेनापति सेल्युकस निकेटर को हराकर विशाल साम्राज्य बनाया. सम्राट अशोक, जो आगे चलकर बौद्ध धर्म को एशिया के बड़े हिस्से तक फैलाने वाले महान सम्राट बने, इसी मगध (बिहार) के शासक थे.

भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा गया गुप्त साम्राज्य

गुप्त साम्राज्य (चंद्रगुप्त I, समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त II) का विस्तार आज के उत्तर प्रदेश और मध्य भारत तक था, पर पाटलिपुत्र और मगध क्षेत्र इसकी शक्ति का केंद्र बना रहा. इस काल को भारतीय इतिहास में स्वर्णयुग कहा जाता है. इस धरती पर साहित्य, विज्ञान, गणित, कला, वास्तुकला का व्यापक विकास हुआ.

भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की धरती

भगवान बुद्ध ने अपना जीवन काल का बड़ा हिस्सा मगध, वैशाली, राजगीर, नालंदा आदि क्षेत्रों में बिताया. बोधगया (गया जिला) में ही बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ. राजगीर, वैशाली, नालंदा में उन्होंने अनेक प्रवचन दिए. जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म कुंडलपुर (आधुनिक वैशाली के पास) माना जाता है, और उनकी साधना का बड़ा भाग भी इस क्षेत्र में बीता. यानी बौद्ध और जैन धर्म, जो आगे चलकर पूरे एशिया और दुनिया को प्रभावित करते हैं—दोनों का मूल केंद्र आज का बिहार ही है.

साल 1912 में अंग्रेजों ने अलग राज्य बनाया

बाद के दिनों में पाला और सेन वंश बौद्ध धर्म के संरक्षक रहे, जिन्होंने नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों को संरक्षण दिया. दिल्ली सल्तनत और मुगलकाल में भी बिहार एक सूबा के रूप में महत्वपूर्ण प्रशासनिक इकाई बना, यहां फारसी संस्कृति और सूफी परंपरा ने भी गहरी जड़ें जमाईं. ब्रिटिश काल में बिहार लंबे समय तक बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा रहा. अंग्रेजों ने साल 1912 में बिहार और उड़ीसा को अलग प्रांत बनाया.

आजादी के आंदोलन में अहम भूमिका

स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की अग्रणी भूमिका रही. चंपारण में महात्मा गांधी का सत्याग्रह (1917) आधुनिक भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष का टर्निंग पॉइंट था. जयप्रकाश नारायण (जेपी) का जन्म और आंदोलन भी बिहार की धरती से जुड़े हैं, जिसने आगे चलकर आपातकाल के खिलाफ पूरे देश को जगाया.

बिहार ने देश और दुनिया को क्या क्या दिया?

बिहार ने दुनिया को ज्ञान की वैश्विक राजधानी के रूप में स्थापित किया. नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालय आज भी सुनहरे पन्नों की तरह याद किये जाते हैं. नालंदा विश्वविद्यालय 5वीं12वीं शताब्दी के बीच दुनिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक था. चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत, श्रीलंका, दक्षिण पूर्व एशिया से विद्यार्थी यहां शिक्षा लेने आते थे. बौद्ध दर्शन, व्याकरण, गणित, खगोल शास्त्र, चिकित्सा, तर्कशास्त्र आदि के अध्ययन के लिए यह विश्वविद्यालय मशहूर रहा. इसी तरह भागलपुर के पास विक्रमशिला विश्वविद्यालय था, जिसे पाला राजाओं का संरक्षण प्राप्त था. यह तांत्रिक बौद्ध धर्म (वज्रयान) का प्रमुख अध्ययन केंद्र रहा. इन प्राचीन विश्वविद्यालयों ने भारत को विश्वगुरु बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई, और ज्ञान परंपरा को चीन, तिब्बत, दक्षिण पूर्व एशिया तक फैलाया.

धर्म और दर्शन

भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति का स्थल बोधगया बिहार में ही है. मौर्य सम्राट अशोक ने यहीं से बौद्ध धर्म को श्रीलंका, मध्य एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया तक फैलाया. आज भी विश्व भर के बौद्ध तीर्थयात्री बोधगया, राजगीर, नालंदा, वैशाली आदि स्थलों पर आते हैं. जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर की जन्मभूमि वैशाली के निकट कुंडलपुर में है. जैन आगम और साधना परंपरा का बड़ा हिस्सा मगध और मिथिला में विकसित हुआ. मिथिला (उत्तरी बिहार) प्राचीन काल से ही तर्क, न्याय और मीमांसा दर्शन का गढ़ रहा. महान दार्शनिक आचार्य गंगेश, विद्यापति आदि ने न्याय शास्त्र व काव्य परंपरा को नई ऊंचाई दी.

महान गणितज्ञ आर्यभट्ट की धरती



महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट, जिनका जन्म अधिकतर विद्वान कुशवाहक (मगध/पटना क्षेत्र) या इसके आसपास मानते हैं. दशमलव पद्धति के विकास में उनका योगदान है तो π (पाई) का सन्निकटन, ग्रहों की गति, त्रिकोणमिति आदि का विस्तार भी आर्यभट्ट ने किया. भास्कर, ब्रह्मगुप्त आदि का कार्य भी नालंदा मगध क्षेत्र की ज्ञान परंपरा से जुड़ता है.




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