KNOWLEDGE :- लाल किले का असली नाम क्या है? जो मुगल बादशाह ने रखा था !
दिल्ली ब्लास्ट से लाल किला चर्चा में आया गया है. बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका असली नाम लाल किला नहीं है. मुगलों ने जब इसका निर्माण कराया तो इसे कुछ और नाम दिया था. हालांकि, बाद में लाल बलुआ पत्थर से बना होने के कारण लोग इसे लाल किला कहने लगे. जानिए, क्या है इसका असली नाम.
दिल्ली ब्लास्ट से चर्चा में लाल किला… दिल्ली में लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास हुए ब्लास्ट ने पूरे देश को हिला दिया है. ब्लास्ट में 9 की मौत हुई और 20 लोग घायल हुए है. इस घटना के बाद लाल किला चर्चा में आ गया है. वो लाल किला जो मुगलों की विरासत है. जिसने कई हमलों को सहा और मुगलों के अंत को भी अपनी आंखों से देखा. दिलचस्प बात है कि जिस लाल किले को मुगलों को विरासत बताया जाता है, उसका असली नाम लाल किला था ही नहीं. मुगलों ने इसे कुछ और दिया था नाम
कब हुआ था निर्माण… लाल किले का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने कराया. 1638 से 1648 तक इसका निर्माण चला. यह न केवल मुगल स्थापत्य कला का बेहतरीन उदाहरण है बल्कि इस पर भारतीय, फारसी और इस्लामी शैलियों का भी प्रभाव देखने को मिलता है. यूं ही यह दुनियाभर में फेमस है
लाल किले का असली नाम… दिल्ली के लाल किले का असली नाम किला-ए-मुबारक रखा गया था. लाल किले को यह नाम इसे बनवाने वाले मुगल बादशाह शाहजहां ने दिया था. दरअसल, शाहजहां ने अपनी नई राजधानी शाहजहानाबाद (आज का पुराना दिल्ली क्षेत्र) में बसाई थी. इसके लिए 1638 में इस किले का निर्माण शुरू कराया, जिसे मुगलकाल में किला-ए-मुबारक के नाम से जाना गया.
कैसे बदला नाम… मुगलों के दौर में इसे किला-ए-मुबारक ही कहा जाता था. इसका नाम बदलने में सबसे बड़ा रोल इसकी दीवारों का रहा, जो लाल बलुआ पत्थर से बनी हैं. यह लाल है. लाल दीवारों के कारण इस किले को लाल किला कहा जाने लगा. इस नाम को पॉपुलर करने में सबसे बड़ी भूमिका अंग्रेजों की रही. उन्होंने लाल किला नाम का ज्यादा इस्तेमाल किया
लाल किले में लगता है मीना बाजार… मुगलों के दौर में लाल किले में मीना बाजार लगता था, जहां केवल शाही महिलाएं, राजकुमारियां और हरम की महिलाएं खरीदारी करती थीं. यह आम जनता के लिए नहीं खुलता था, लेकिन अब यहां टिकट के जरिए आम लोगों को भी एंट्री मिलती है और महिलाएं यहां लगने वाले मीना बाजार में खरीदारी कर सकती हैं

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